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पाठकनामा

अब सरकार प्रोत्साहन दे

29 दिसंबर के अंक में रतींद्र नाथ की रपट बारह की उम्र में बारह ही किताबें पढ़ीं। बारह साल के नमितेश भूषण ने इतनी छोटी-सी उम्र में बारह किताबें लिखकर वास्तव में एक कीर्तिमान स्थापित किया है। जिस उम्र में बालक अधिकांशतया टीवी पर कार्टून देखते हैं या कंप्यूटर पर गेम खेलते हैं, उसी उम्र में नमितेश ने अपनी प्रतिभा का लोहा दुनिया को मनवा दिया है। इससे एक बार फिर ये साबित हो गया है कि प्रतिभाएं धन या संसाधनों की मोहताज नहीं होती हैं। अब ऐसे प्रतिभावानों को सरकार से प्रोत्साहन की जरूरत है। पता नहीं यही बालक भविष्य का प्रेमचंद या राहुल सांकृत्यायन बन जाए!

सतीश कुमार अल्लीपुरी, चंदौसी

वर्तमान का यथार्थ चित्रण

साप्ताहिक पत्रिका शुक्रवार पहली बार देखने का सुयोग प्राप्त करके आनंदित हुई। 22 दिसंबर के अंक में ज्हादसों के बहाने शीर्षक से लिखा संपादकीय वर्तमान स्थितियों का यथार्थ चित्रण है। घटनाओं-दुर्घटनाओं का ऐसा जाल रहता है कि कुछ देर के लिए अचंभित-दुखी होकर पुन: जीवन अपनी धारा में बहने लगता है। बड़ी-बड़ी घटनाएं भी कुछ देर के लिए ही स्मृति में टिक पाती हैं। राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक हलचल को जानने के लिए शुक्रवार का योगदान उस दर्पण की भांति है, जो समय के चेहरे को प्रतिबिंबित करती है। पत्रिका के सभी स्तंभ- राज्यों से, विशेष, अर्थ-क्षेत्रे, मीडिया, खेल-क्षेत्रे, साहित्य इत्यादि जीवन के सर्वागीण जगत को रूपायित करते हैं। साहित्य हाशिये पर है, मगर ज्शुक्रवार ने साहित्य की समस्त विधाओं- कहानी, व्यंग्य, कविता और समीक्षा को स्थान देकर पुनीत कार्य किया है।

- शकुंतला तंवर, अजमेर

सत्य ही लिखा है

22 दिसंबर के अंक के संपादकीय हादसों के बहाने में सत्य ही लिखा है कि पहले हादसे में विशिष्ट लोग मरे, उन्हें इसी प्रकार मरना था। दूसरे हादसे में गरीब वर्ग के लोग थे, कोलकाता सरकार ने सोचा कि चलो, आबादी कुछ कम हुई और इसी विचार स्वरूप मीडिया ने भी कवरेज किया। अस्पतालों में आग से बचाव की समुचित व्यवस्था हो और कच्ची शराब पर आबकारी विभाग का नियंत्रण हो, क्या यह देखना प्रदेश सरकार का कार्य नहीं है? आधे-अधूरे प्रबंध से प्राइवेट अस्पताल रईसों को लूट रहे हैं। कच्ची शराब के व्यवसायी गरीबों को लूट रहे हैं और उनकी जानें भी ले रहे हैं।

- महेश रूपैनवार, रायबरेली

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