



मीडियाये हैं हमारे नए मीडिया मुगलनकुव
देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज ने देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समूह में एक बड़ी हिस्सेदारी में निवेश किया है। नेटवर्क-18 नाम से देश में कई खबरिया और मनोरंजन चैनलों का संचालन करने वाले समूह की एक बड़ी हिस्सेदारी में अब रिलायंस इंडस्ट्रीज का अहम हिस्सा हो गया है। इस हिस्सेदारी के बाद नेटवर्क-18 ने दक्षिण भारत के एक बड़े मीडिया समूह इनाडू के दर्जनों खबरिया चैनलों का भी अधिग्रहण कर लिया है। नेटवर्क -18 का कहना है कि क्षेत्रीय स्तर पर विज्ञापनों और दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा इन चैनलों के पास था जिसका अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लाभ मिलेगा। नेटवर्क -18 का कहना है कि इस निवेश के साथ उसके राजस्व में भी भारी वृद्घि की संभावना है। रिलायंस द्वारा मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में भारी निवेश करने के बाद देश के कई दूसरे औद्योगिक समूह भी मीडिया के धंधे में उतर सकते हैं। नेटवर्क-18 में हिस्सेदारी को काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में विविधता भरे मीडिया क्षेत्र में किसी औद्योगिक समूह द्वारा निवेश करना इस बात का संकेत है कि भविष्य में इस क्षेत्र में जबरदस्त उछाल आएगा। मीडिया और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 2010 में इस क्षेत्र में 800 अरब रुपये का कारोबार हुआ। जानकार कहते हैं कि चार साल के भीतर यह इंडस्ट्री 1250 अरब रुपयों के पार हो जाएगी। एक अनुमान के अनुसार 2015 तक देश में 18.70 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगेंगे। टीवी देश के हर घर तक पहुंच बना चुका है। 80 फीसदी आबादी तक केबिल और डीटीएच की पहुंच हो चुकी है। इस वक्त देश में 600 टीवी चैनल हैं। हर साल 1,000 फिल्में बनती हैं। इसे देखते हुए बड़े औद्योगिक समूह मीडिया और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्रीज में कदम रख रहे हैं। इस निवेश से सबसे ज्यादा लाभ नेटवर्क-18 और टीवी-18 को हुआ, जो करीब 500 करोड़ के कर्जे के बोझ से दबा था। रिलायंस के भारी निवेश के बाद अब इस समूह के निदेशक ने कहा है कि अब उन्हें किसी दूसरे निवेश की जरूरत नहीं है। टीवी पत्रकारिता के असर और उसकी व्यापक पहुंच की वजह से देश के बड़े-बड़े उद्योगपति अब इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि किसी तरह मीडिया को काबू में किया जाए। रिलायंस द्वारा एक साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय खबरिया चैनलों और मनोरंजन चैनलों में निवेश करने के बाद अब उसे इस बात का खतरा नहीं है कि उसके ग्रुप के बारे में कोई चैनल उल्टी-सीधी खबरें दिखाएगा। देश में जिस तरह से मीडिया के क्षेत्र में गैर पेशेवर लोग आ रहे हैं, उससे मीडिया की साख और नैतिकता को खतरा हो सकता है। मीडिया बाजार में भारी पूंजी निवेश करने वाली रिलायंस कंपनी के बारे में कहा जा रहा है कि वह अपनी आगामी जी-4 परियोजना की सफलता के लिए अभी से बंदोबस्त कर रही है। कहा जा रहा है कि आगामी कुछ दिनों में रिलायंस समूह मोबाइल के क्षेत्र में उतरने वाला है। उसी के मद्देनजर रिलायंस ने मीडिया के बाजार में पैर जमाने का फैसला किया है ताकि रास्ते की बाधाओं से निपटा जा सके। रिलायंस (आरआइएल) का कहना है कि उनकी कंपनी की सहयोगी इकाई इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट टीवी-18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड और नेटवर्क-18 मीडिया इंवेस्टमेंट लिमिटेड के शेयर खरीदेगी। माना जा रहा है कि अब रिलायंस के पास इन कंपनियों का 30 फीसदी हिस्सेदारी हो जाएगी। टीवी-18 और नेटवर्क 18 के कंटेंट (विषय-वस्तु) और वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) पर पहला अधिकार अब आरआइएल की सहयोगी कंपनी इफोटेल ब्रॉड बैंड सर्विसेस लिमिटेड का होगा और भविष्य में इनका प्रसारण 4 जी ब्रॉड बैंड के जरिए ही होगा। टीवी मीडिया में देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह द्वारा भारी निवेश के बाद अब यह बात साफ हो चुकी है कि मीडिया के जरिए आगे बढ़ने की इच्छा बड़े औद्योगिक समूहों को भी होने लगी है। पत्रकारिता क्षेत्र के पारखी इस निवेश को शंका की नजरों से भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि देश के सबसे बड़े औद्योगिक साम्राज्य के मालिक और उनके ग्रुप के बारे में अब खबरों को प्रसारित करते वक्त कंटेंट का निर्धारण करने वाले लोग सौ बार सोच-विचार करेंगे। पेड न्यूज पर गला फाड़ कर चिल्लाने वाले टीवी के ब़ड़े पत्रकारों पर अब रिलायंस का सीधा अधिकार हो गया। वे अब वैसा ही करेंगे जैसा रिलायंस के अधिकारी उन्हें निर्देश देंगे। इस निवेश के बाद शेयर बाजार में तो भारी उछाल देखा गया लेकिन मीडिया के क्षेत्र के लोगों के मुंह लटके देखे गए। |


